मेरे प्रिय ढाढ़ी समाज भाई और बहनो को प्रेमपूर्वक नमस्कार.....
आज का विषय
समाज में कौन-कौनसी विशेषताएँ होनी चाहिए ?
मेरे ढाड़ी समाज के प्रिय साथियों हमारे समाज में कौन-कौनसी विशेषताएं होनी चाहिए, इसके बारे में आपके सामने कुछ बाते रखना चाहता हूँ । १) लोगो का समूह २) पारंपारिक सहयोंग ३) सांझे उद्देश्य ४) भाई चारे की भावना ५) शांतिपूर्ण वातावरण ६) संघठन ७) रीती रिवाज़ ८) संस्कृति का जतन ९) देशाभिमान १०) सर्व धर्म समभाव ये विशेषताएँ समाज में होनी चाहिए । इनके बारे में हम विस्तार से जानकारी लेगें ।
१) लोगो का समूह -
समाज की मुख्य विशेषता समूह है। लोगों के समूह के बिना समाज के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मनुष्य स्वाभाविक रूप से सामाजिक प्राणी है और समाज में रहना उनके लिये स्वाभाविक है। मानव का स्वभाव मनुष्य को समाज में रहने के लिए प्रेरित करता है, और मनूष्य की आवश्यकताएँ उसे समाज में रहने के लिए मजबूर करती है।
२) पारंपारिक सहयोंग -
यदि लोगों के समूह में आपसी सहयोंग की कमी है तो उस समूह को समाज नहीं कहाँ जा सकता। समाज में आपसी सहयोंग और एकता होना जरुरी है। पारंपारिक सहयोंग से ही समाज का विकास हो सकता है । समाज पर कोई संकट आता है तो पारम्परिक सहयोग से ही दूर किया जा सकता है । इसलिए पारंपारिक सहयोंग जरुरी है ।
३ ) सांझे उद्देश्य -
समाज का निर्माण किसी व्यक्ति या वर्ग के विशेष उद्देश्यों को पूरा करने को लिए नहीं, बल्कि मानव जीवन की बुनियाद जरूरतो को पूरा करने के लिए किया जाता है ।
४) भाईचारे की भावना -
समुदाय में रहनेवाले लोग विभिन्न जातियों या धर्मो के हो सकते है, लेकिन उनमे भाईचारा का होना जरुरी है। यदि व्यक्ति में ऐसी कोई भावना नहीं है, तो हर एक व्यक्ति स्वार्थ के लिए सामाजिक हितों को नष्ट कर देगा । हर मनूष्य के अंदर भाईचारे की भावना होना जरुरी है ।
५) शांतिपूर्ण वातावरण -
समाज के निर्माण के लिए शांतिपूर्ण वातावरण का होना महत्वपूर्ण है। शांतिपूर्ण वातावरण को समाज का एक आवश्यक तत्व माना हैं । शांतिपूर्ण वातावरण से समाज का विकास करने में कम समस्याएं निर्माण होती है और समाज का विकास सफलतापूर्ण होता है ।
६) संघठन -
समाज की एक मुख्य विशेषता उसका संघठन है। केवल भीड़ को ही समाज नहीं माना जा सकता । समाज के लिए व्यक्तियों में किसी न किसी प्रकार का संघठन होना चाहिए । बिना संगठन के हम कुछ नहीं कर सकते । छोटा हो या बड़ा हो, लेकिन संगठन होना ही चाहिए । हर एक समाज की ताकद उसका मजबूत संगठन ही है। जिस समाज का सगंठन मजबूत है, उस समाज का विकास तेजी से होता हैं ।
७) रीती रिवाज़ -
समाज में रहनेवाले लोगें के अपने रीति-रिवाज होते हैं, जो लोगो में समाजरूप से रहने की भावना पैदा करते हैं । हर समाज को अपने रीती-रिवाजो का पालन और उनका जतन करना जरुरी हैं।
समाज में रहनेवाले लोगें के अपने रीति-रिवाज होते हैं, जो लोगो में समाजरूप से रहने की भावना पैदा करते हैं । हर समाज को अपने रीती-रिवाजो का पालन और उनका जतन करना जरुरी हैं।
८) संस्कृति का जतन -
हर एक समाज की, हर एक जाती की अपनी - अपनी एक संस्कृति होती है । उस संस्कृति को जतन करना, समाज में रहनेवाले हर एक लोगो का दायित्व बनता है । हर एक समाज की अलग सी पहचान उसकी संस्कृति ही है ।
९) देशाभिमान -
हम अपने समाज से जितना प्यार करते हैं , उतना ही प्यार हमें अपने देश से होना जरुरी हैं । हम पहले देश के नागरिक है , यह भूलना नहीं चाहिए । हमारे देश का अभिमान होना चाहिए , हम अपने समाज से जितना प्यार करते है , उतना ही प्यार अपने देश से करना चाहिए । ये हर एक नागरिक का दायित्व बनता है ।
१०) सर्वधर्म समभाव -
अपने समाज के साथ - साथ, अन्य जाती , धर्मो का भी आदर करना चाहिएँ । अन्योंका भेद करने से अपने समाज के विकास में बाधाएँ निर्माण हो सकती हैं । इसिलिए हमें सर्वधर्म समभाव के साथ समानता, बंधुता इन मूल्यों का भी पालन करना जरुरी हैं l इन मूल्यों का पालन करना हमारा परम कर्तव्य बनता है ।
मेरे प्रिय साथियों, ऊपर बताई गई विशेषताएंँ में से हमारे समाज में क्या है और क्या नहीं है । इसपर जरा गौर करना जरुरी है , और इसमे हमारे इसमे से समाज में जो भी कमिया है , उसे हम सब मिलकर दूर करने का प्रयास करेंगे । इसके लिए आपका सहयोंग होना जरुरी है । तभी हमारे समाज का विकास हो सकता है ।
साथियो, हम अपनी खुद की जिंदगी सुकून से जी रहे है, पर हमे अपने समाज के बारे में सोचना चाहिए । जो इन्सान खुद अपने समाज के बारे में सोचता है , वो समाज कभी भी विकास से दूर हो ही नहीं सकता। आज हमारे समाज को एकजुट करने के लिए हमें ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। आज सोशल मिडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया उपलब्ध है, उनका सदुपयोग करके हमें अपने समाज को जोड़ने का काम करना चाहिए।
साथियों, हमारा ढाढी समाज विकास से कोसो दूर है, हमारे समाज का निच्छित इतिहास भी मौजूत नहीं है। आज हमारे समाज की विचारधारा अलग - अलग दिखाई देती है, यदि ऐसा ही होता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा की लोग कहेंगे, एक था ढाढ़ी समाज। ऐसा दिन आप देखना पसंद करोगे क्या? यदि आपको लगता है की, ऐसा होना नहीं चाहिए। तो आज हमको ढाढी बंजारा समाज बहुउद्देशिय संघठन जैसा का मंच मिला हैं। इस संघठन को आप सभी का साथ जब मिलेगा, तब निश्चितरूप से हमारा समाज परिवर्तन की और बढेगा।
साथियों, हमारा ढाढी समाज विकास से कोसो दूर है, हमारे समाज का निच्छित इतिहास भी मौजूत नहीं है। आज हमारे समाज की विचारधारा अलग - अलग दिखाई देती है, यदि ऐसा ही होता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा की लोग कहेंगे, एक था ढाढ़ी समाज। ऐसा दिन आप देखना पसंद करोगे क्या? यदि आपको लगता है की, ऐसा होना नहीं चाहिए। तो आज हमको ढाढी बंजारा समाज बहुउद्देशिय संघठन जैसा का मंच मिला हैं। इस संघठन को आप सभी का साथ जब मिलेगा, तब निश्चितरूप से हमारा समाज परिवर्तन की और बढेगा।
साथियों, मुझे आशा है की आप समाज को आगे ले जाने के लिए जरूर सहयोंग करोगे । आप के सहयोंग से ही अपने समाज का विकास हो सकता हैं। एकता में ही ताकद होती है। आओ हम सब मिलकर समाज को जोड़ने का पवित्र कार्य करे।
साथियों, आज कोरोना पूरी दुनिया में कहर मचा रहा है, आज धन, दौलत कुछ काम नहीं आ रही है। आज काम आ रही सिर्फ अपनी इंसानियत , इसे इंसानियत को आगे बढ़ाते हुए हमें अपने समाज को आगे ले जाना है।
साथियों, आज कोरोना पूरी दुनिया में कहर मचा रहा है, आज धन, दौलत कुछ काम नहीं आ रही है। आज काम आ रही सिर्फ अपनी इंसानियत , इसे इंसानियत को आगे बढ़ाते हुए हमें अपने समाज को आगे ले जाना है।
ढाढी बंजारा समाज बहुउद्देशिय संघठन के मुख्य उद्देश्य
१) शिक्षा क्षेत्र में सहाय्यता करना
२) समाज की समस्याओंका हल निकालने के लिए न्यायपालिका का निर्माण करना।
३) महिलाओंको सक्षम बनाने के लिए लघु उद्योग के लिए सहाय्यता करना और महिला संघठन का निर्माण करना।
४) युवा - युवतियोंको कौशल्य प्रशिक्षण देना और रोजगार उपलब्धि के लिए सहाय्यता करना।
इन सभी उद्देशोंपर ढाढी बंजारा समाज बहुउद्देशिय संस्थान नियोजन पूर्वक कार्य करने के लिए कटिबद्ध रहेगा। सिर्फ जरुरत है आपके प्यार और सहयोंग की।
धन्यवाद....!
1)जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का।
फिर देखना फिज़ूल है कद आसमान का।।डरना नहीं यहाँ तू किसी भी चुनौती से।
बस तू ही सिकन्दर है सारे ज़हान का।।
२) लहरों को साहिल की दरकार नही होती।
हौसलें बुलंद हो तो कोई दीवार नही होती।।जलते हुए चिराग ने आँधियों से ये कहा।
उजाला देने वालों की कभी हार नही होती ।।
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