गाँव - मलकीसर ( MALIKSAR )
तहसील - लूणकरणसर
जिल्हा - बीकानेर
पिन कोड - 334604
पूला की पत्नी का नाम मलकी था , जिसको लेकर बाद में गोदारा व सारणों के बीच युद्ध हुआ. मलकी के नाम पर ही बीकानेर जिले की लूणकरणसर तहसील में मलकीसर गाँव बसाया गया था।मलकीसर, पाण्डूसर, नकोदरसर, शेखसर,शेरपुरा और गोपलाणा सभी गाँव बीकानेर जिले की लूणकरणसर तहसील में हैं। संभवतः पांडू के नाम पर पाण्डूसर, शेरसिंह के नाम पर शेरपुरा और नकोदर के नाम पर नकोदरसर बसाया गया है।
मलकी का मामला और लाघड़िया युद्ध
उस समय पूला सारण भाड़ंग का शासक था और उसके अधीन 360 गाँव थे। पूला की पत्नी का नाम मलकी था, जो बेनीवाल जाट सरदार रायसल की पुत्री थी। उधर लाघड़िया में पांडू गोदारा राज करता था। पांडू गोदारा बड़ा दातार था। एक बार विक्रम संवत 1544 (वर्ष 1487) के लगभग लाघड़िया के सरदार पांडू गोदारा के यहाँ एक ढाढी गया, जिसकी पांडू ने अच्छी आवभगत की तथा खूब दान दिया। उसके बाद जब वही ढाढी भाड़ंग के सरदार पूला सारण के दरबार में गया तो पूला ने भी अच्छा दान दिया। लेकिन जब पूला अपने महल गया तो उसकी स्त्री मलकी ने व्यंग्य में कहा "चौधरी ढाढी को ऐसा दान देना था जिससे गोदारा सरदार पांडू से भी अधिक तुम्हारा यश होता।
इस सम्बन्ध में एक लोक प्रचलित दोहा है -
धजा बाँध बरसे गोदारा, छत भाड़ंग की भीजै ।
ज्यूं-ज्यूं पांडू गोदारा बगसे, पूलो मन में छीज ।।
सरदार पूला मद में छका हुआ था। उसने छड़ी से अपनी पत्नी को पीटते हुए कहा यदि तू पांडू पर रीझी है तो उसी के पास चली जा। पति की इस हरकत से मलकी मन में बड़ी नाराज हुई और उसने चौधरी से बोलना बंद कर दिया। मलकी ने अपने अनुचर के मध्यम से पांडू गोदारा को सारी हकीकत कहलवाई और आग्रह किया कि वह आकर उसे ले जाए। इस प्रकार छः माह बीत गए. एक दिन सब सारण जाट चौधरी और चौधराईन के बीच मेल-मिलाप कराने के लिए इकट्ठे हुए जिस पर गोठ हुई. इधर तो गोठ हो रही थी और उधर पांडू गोदारे का पुत्र नकोदर 150 ऊँट सवारों के साथ भाड़ंग आया और मलकी को गुप्त रूप से ले गया। पांडू वृद्ध हो गया था फ़िर भी उसने मलकी को अपने घर रख लिया। परन्तु नकोदर की माँ, पांडू की पहली पत्नी, से उसकी खटपट हो गयी इसलिए वह गाँव गोपलाणा में जाकर रहने लगी। बाद में उसने अपने नाम पर मलकीसर बसाया।
इस कहाँनी को बताने के पीछे यह मकसद है की, ढाढ़ी समाज का खुद का एक गौरवशाली इतिहास है। प्राचीन काल से ही ढाढी समाज को राजदरबार में महत्वपूर्ण स्थान था। राजदरबार में ढाढी का आदर - सत्कार करके उन्हें सम्मानित किया जाता था। हमारे समाज का गौरवशाली इतिहास को हमे जानना और समझना चाहिए।
सोचो , समझो और समाज के लिए आगे बढ़ो और एक दुसरो को सहयोग करों ......
सौजन्य - सरस्वती माता सामाजिक बहुउद्देशिय संस्था
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